
तुम्हारा आना,मेरे जीवन में,
रंगों का जैसे भर जाना,
जीवन क्या है,
तुमसे ही मैंने ये जाना,
हँसना-हँसाना न कि रोना-रुलाना,
रुलाना तो आता है सभी को,
जो हँसा सके किसी को,
उसने ही जीवन का मर्म जाना,
बिना कहे ही मुझको समझाना,
और साथ ही,
मेरे भीतर कहीं अन्दर तक उतर जाना,
रात को पलकों में बंद,
ख़्वाबों में तुम्हारा आना,
और कहना,
कि ये तो एक सपना है....
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