न जाने तुम कौन हो कहाँ हो,
रातों को पलकों में बंद ख्वाबों में,
चुपके से तुम आते हो,
दिल के रिसते घावों को,
दर्द नया दे जाते हो,मैं भागना चाहती हूँ तुमसे,दूर कहीं दूर,ताकि तुम न आओ मेरे पास,क्योंकि मैं जानती हूँ,किसी को पाकर खो देना,कितना दुखदायी होता है,इसलिए,बस इसीलिए,मैं तुम्हें पाना भी नहीं चाहती..