
मैं भी शायद एक बूँद के समान हूँ,
एक बूँद, जो कुछ भी नहीं बादलों के बीच,
जब बरसती है तो कहलाती है बारिश,
जब मिलती है नदियों से, तो बन जाती है जल धारा,
एक बूँद;
जब मिलती है सागर से,
तो बनाती है लहर,
किसी प्यासे को मिले,
तो बन जाती है अमृत,
पर एक बूँद,
टपकी तुम्हारी आंखों से,
और गुम हो गई,
तुम्हारे गालों में.
No comments:
Post a Comment