अलविदा मेरे दोस्त अलविदा
कभी चाहा था तुम्हें अपना मानकर
अपनाया था तुम्हारी कमियां जानकर
मगर अब
किसी शाम किसी राह पर
ग़र मुलाकात हो हमारी
तो गुज़र जाना यूँ ही
पास से
न चेहरे पर मुस्कान ओढना
न नज़रों में पहचान रखना
न मैं पहचान पाऊँगी तुम्हें
न तुम मुझे पहचान सकना
बस गुज़र जाना यूँ ही
पास से
न साँसों को साँस छू पाए
न एहसासों को एहसास छू पाए
कुछ ऐसे ख़त्म होगी
कहानी हमारी
कि बस
बने रहेंगे अजनबी
तुम मेरे लिए
मैं तुम्हारे लिए
अलविदा मेरे दोस्त अलविदा
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