अलविदा मेरे दोस्त अलविदा
कभी चाहा था तुम्हें अपना मानकर
अपनाया था तुम्हारी कमियां जानकर
मगर अब
किसी शाम किसी राह पर
ग़र मुलाकात हो हमारी
तो गुज़र जाना यूँ ही
पास से
न चेहरे पर मुस्कान ओढना
न नज़रों में पहचान रखना
न मैं पहचान पाऊँगी तुम्हें
न तुम मुझे पहचान सकना
बस गुज़र जाना यूँ ही
पास से
न साँसों को साँस छू पाए
न एहसासों को एहसास छू पाए
कुछ ऐसे ख़त्म होगी
कहानी हमारी
कि बस
बने रहेंगे अजनबी
तुम मेरे लिए
मैं तुम्हारे लिए
अलविदा मेरे दोस्त अलविदा
Tuesday, December 22, 2009
Wednesday, December 9, 2009
कांटे
काँटों की सेज पर बैठी मैं
रेशम की डोर सी मेरी जिंदगी
मेरे पास से यूँ सरकती चली गई
न कोई आह न सिसकी
कुछ यूँ मेरी मुस्कराहट
आंसुओं से दरकती चली गई
कोई आया न घूंघट उठाने
और मैं आँचल का हर मोती
तेरे नाम पे रखती चली गई
हाथ उठाये तुम्हें छूने को
तुम नज़र फेर के चल दिए
और मेरी नज़रें
तेरे हर कदम के निशान पर झुकती चली गई
रंग..
खिड़की से झांकता चाँद
और कटी फटी सी चांदनी
जो सीखचों की आड़ से बचकर
किसी तरह मेरे पास आकर बैठ गई
ओस ने छींटे दिए
और मिलकर मुझे सहलाया
दुलारा मुझे
और सजा दिया मेरे बेचारे सपनों को
एक नई उम्मीद देकर
की कोई तो आएगा
मेरी अंजुरी में रंग भरने.....
और कटी फटी सी चांदनी
जो सीखचों की आड़ से बचकर
किसी तरह मेरे पास आकर बैठ गई
ओस ने छींटे दिए
और मिलकर मुझे सहलाया
दुलारा मुझे
और सजा दिया मेरे बेचारे सपनों को
एक नई उम्मीद देकर
की कोई तो आएगा
मेरी अंजुरी में रंग भरने.....
Wednesday, December 2, 2009
इंतज़ार
कभी सोचा था
जीवन की इस राह पर
जो कहीं ऊँची कहीं नीची
कहीं टेढ़ी कहीं मेढ़ी है
साथ चलोगे तुम
मेरा हाथ थामकर
मगर क्या पता था
की ज़िन्दगी में
जो मैं चाहूँ वही नहीं होगा
क्योंकि रिश्ते
किसी एक के बनाये नहीं बनते
क्या पता था
कि एक दिन
तुम चल दोगे मुझे छोड़कर
और मैं बैठी रह जाऊँगी
तुम्हारे इंतज़ार में
क्या पता था
कि बहारें आएँगी
और फिर लौट जायेंगी
मेरे जीवन को फिर से
सूना करने के लिए
और मैं बैठी रह जाऊँगी
तुम्हारे इंतज़ार में..
जीवन की इस राह पर
जो कहीं ऊँची कहीं नीची
कहीं टेढ़ी कहीं मेढ़ी है
साथ चलोगे तुम
मेरा हाथ थामकर
मगर क्या पता था
की ज़िन्दगी में
जो मैं चाहूँ वही नहीं होगा
क्योंकि रिश्ते
किसी एक के बनाये नहीं बनते
क्या पता था
कि एक दिन
तुम चल दोगे मुझे छोड़कर
और मैं बैठी रह जाऊँगी
तुम्हारे इंतज़ार में
क्या पता था
कि बहारें आएँगी
और फिर लौट जायेंगी
मेरे जीवन को फिर से
सूना करने के लिए
और मैं बैठी रह जाऊँगी
तुम्हारे इंतज़ार में..
लेना-देना
देखा था एक सपना
चाहा था बनाना तुम्हें अपना
पर शायद
ऊपर वाले ने
मुझे देना तो सिखाया
पर तुम्हें लेना नहीं आया
चाहा था बनाना तुम्हें अपना
पर शायद
ऊपर वाले ने
मुझे देना तो सिखाया
पर तुम्हें लेना नहीं आया
लहरें
तुमने लहरों की तरह
आकर छू लिया
मेरे एहसासों का वो किनारा
जो बरसों से पड़ा था
अनदेखा,अनछुआ
और हलके होते
क़दमों के निशानों की तरह
समेट लिया मुझे अपने भीतर
और बिन कहे कह दिया
वो सब
जो मैं कहकर भी नही कह पाती
आकर छू लिया
मेरे एहसासों का वो किनारा
जो बरसों से पड़ा था
अनदेखा,अनछुआ
और हलके होते
क़दमों के निशानों की तरह
समेट लिया मुझे अपने भीतर
और बिन कहे कह दिया
वो सब
जो मैं कहकर भी नही कह पाती
चलते चलते
कभी सोचा न था
जीवन के किसी मोड़ पर
कहीं मिल जाओगे तुम
यूँ ही चलते चलते
कभी सोचा न था
ये छोटी सी मुलाकात
मेरा जीवन बन जाएगी
यूँ ही
कभी सोचा न था
की तुम चल दोगे
मुझे छोड़ कर अकेला
उस राह पर
जिस पर तुम कभी मुझे मिले थे
कभी सोचा न था
पर मैं इंतज़ार करुँगी
सारी उम्र
इसी आशा में की शायद
तुम उसी तरह दोबारा मिलो
जैसे पहले मिले थे
चलते चलते..
जीवन के किसी मोड़ पर
कहीं मिल जाओगे तुम
यूँ ही चलते चलते
कभी सोचा न था
ये छोटी सी मुलाकात
मेरा जीवन बन जाएगी
यूँ ही
कभी सोचा न था
की तुम चल दोगे
मुझे छोड़ कर अकेला
उस राह पर
जिस पर तुम कभी मुझे मिले थे
कभी सोचा न था
पर मैं इंतज़ार करुँगी
सारी उम्र
इसी आशा में की शायद
तुम उसी तरह दोबारा मिलो
जैसे पहले मिले थे
चलते चलते..
Subscribe to:
Comments (Atom)