Monday, May 10, 2010

वो शिकार लड़की

वो काली यादें
परछाई जैसी
मेरे क़दमों से चिपटी हुई हैं
दिन भर मेरे साथ साथ
चलती हैं
चाहे जहाँ भी जाऊं
मेरे हर कदम के साथ
उठती हैं गिरती हैं
और साथ ही
उठता गिरता है
आँसुओं का तूफ़ान
मेरे भीतर
और रात के अँधेरे में
वो चालाक परछाईयाँ
काले अँधेरे के साथ
घुल मिल कर
ढांप लेती हैं मुझे
ताकि चूस सकें
मेरा बचा खुचा
अल्हड़पन और बचपन

5 comments:

  1. और रात के अँधेरे में
    वो चालाक परछाईयाँ
    काले अँधेरे के साथ
    घुल मिल कर
    ढांप लेती हैं मुझे
    ताकि चूस सकें
    मेरी बचा खुचा
    अल्हड़पन और बचपन


    इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

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  2. सुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।

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  3. bahut hi sundar bhaav liye hue hai aapki rachna..
    very nice.....

    A Silent Silence : Kuch Maang Ke To Dekh..(कुछ माँग के तो देख..)

    Banned Area News : Justin Bieber tired of screaming fans

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  4. बहुत हे सुन्दर लिखा है..सरल, भावपूर्ण ...बहुत अच्छा

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