मन की गीली रेत पर
ये जो कदमों के निशान छोड़े हैं तुमने
जाते जाते उन्हें तो साथ लेते जाओ
मेरी यादों की हर लहर
उन्हें और पक्का ही करेगी
कभी मिटा न सकेगी
और उस निशान में मेरा समर्पण
झाग कि तरह बैठ जाएगा
हमेशा हमेशा के लिए
और रह जाउंगी मैं
अपने साथ लिए
एक खारापन और सपनों की तलछट
पर मेरा मन
किसी के अधूरे स्नेह का प्यासा नहीं
जियूंगी मैं
इस खारेपन को समेटकर
और अपने भीतर पलती
हर कल्पना को इतनी शक्ति दूंगी
कि वो चाँद को भी छू सकें
देखना एक दिन