....पर हुआ क्या?
हाथ छूटा, साथ छूटा,
कसमें टूटी, वादा टूटा,
और दुनिया की तो छोड़,
तू भी मुझसे रूठा,
जबकि तू भी जानता है,
कौन सच्चा कौन झूठा
Thursday, October 1, 2009
न आओ
यूँ मेरी यादों में आया न करो,
पल पल मुझे यूँ तड़पाया न करो,
खुशियाँ तो न दे सके कोई,
कम से कम,
ग़म तो न दे जाया करो...
पल पल मुझे यूँ तड़पाया न करो,
खुशियाँ तो न दे सके कोई,
कम से कम,
ग़म तो न दे जाया करो...
खोना और पाना
न जाने तुम कौन हो कहाँ हो,
रातों को पलकों में बंद ख्वाबों में,
चुपके से तुम आते हो,
दिल के रिसते घावों को,
दर्द नया दे जाते हो,
मैं भागना चाहती हूँ तुमसे,
दूर कहीं दूर,
ताकि तुम न आओ मेरे पास,
क्योंकि मैं जानती हूँ,
किसी को पाकर खो देना,
कितना दुखदायी होता है,
इसलिए,बस इसीलिए,
मैं तुम्हें पाना भी नहीं चाहती..
रातों को पलकों में बंद ख्वाबों में,
चुपके से तुम आते हो,
दिल के रिसते घावों को,
दर्द नया दे जाते हो,
मैं भागना चाहती हूँ तुमसे,
दूर कहीं दूर,
ताकि तुम न आओ मेरे पास,
क्योंकि मैं जानती हूँ,
किसी को पाकर खो देना,
कितना दुखदायी होता है,
इसलिए,बस इसीलिए,
मैं तुम्हें पाना भी नहीं चाहती..
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